राहु शांति एवं काल सर्प दोष का सबसे सरल उपाय


जो जातक राहु की महादशा एवं अन्तर्दशा से गुज़र रहे हैं या जन्म कुंडली में राहु के गलत भाव में बैठने से विपत्तियों, कष्टों, धन नाश का सामना कर रहे हैं उनके दुखों के निवारण हेतु यहाँ एक अति सरल परन्तु सर्वाधिक कारगर उपाय बताया जा रहा है. इसी तरह यदि किसी जातक की उन्नति एवं खुशियों पर काल सर्प दोष कुंडली मारे बैठा है तो उसके निवारण हेतु भी विशिष्ट कारगर उपाय बताने जा रहा हूँ. यह उपाय करने के बाद जातक अपने जीवन की बहुत सारी बाधाओं को बहुत हद तक कम कर पाएगा.भारतीय ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के अध्ययन के समय दो ग्रहों की स्थिति एवं उनकी दृष्टि पर विशेष विचार किया जाता है। वह ग्रह हैं, राहु एवं केतु। पौराणिक कथाओं के अनुसार राहु और केतु पूर्व में एक ही दैत्य था जिसका नाम था स्वरभानु। स्वर्भानु दैत्य अत्रि एवं सिंहमिका का पुत्र था। समुद्र मंथन के उपरान्त जब समुद्र से अमृत बहार आया तो

भगवान् विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर लिया एवं देवताओं को अमृत बांटने लगे। स्वरभानु नामक दैत्य शुक्र एवं चंद्र के बीच देवता बन कर खड़ा हो गया। जैसे ही भगवान् विष्णु ने स्वर्भानु नामक दैत्य को अमृत पिलाया सूर्य एवं मंगल ने भगवान् विष्णु को इशारा किया कि स्वरभानु देवता नहीं बल्कि दैत्य है। भगवान विष्णु ने तुरंत अपने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का गला काट दिया। उसी दिन से स्वर्भानु राहु और केतु दो ग्रह बन गए। क्यूंकि मुख में अमृत जा चुका था अतः केतु की दृष्टि देवताओं के सामान हो गई परन्तु राहु की प्रवृत्ति दैत्य प्रवृत्ति ही रही। राहु के सर नहीं है अतः राहु को भ्रम का प्रतीक माना जाता है। राहु को सांप भी माना जाता है अतः राहु के स्वभाव को आंकलित करना लगभग असंभव है। राहु अपनी महादशा में एवं अन्तर्दशा में जातक को राजा या भिखारी बना सकता है। अनुभव में यह देखने में आया है की

अगर राहु देने पर आ जाए तो राहु से अधिक कोई दूसरा ग्रह दे नहीं सकता परन्तु यदि लेने पर आ जाए तो राहु से ज़्यादा बर्बादी कोई दूसरा करवा नहीं सकता। जिस किसी व्यक्ति पर राहु की महादशा या अन्तर्दशा चल रही हो उस व्यक्ति के द्वारा अक्सर ऐसे गलत निर्णय लिए जाते हैं जिससे कि व्यक्ति का व्यापार, धन, ऐश्वर्य समाप्त हो जाता है। व्यक्ति को यह समझ नहीं आता कि ऐसी क्या वजह है की उसके साथ लगातार गलत ही होता जा रहा है। अधिकाँश व्यक्ति अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण किसी विद्वान् से तब करवाते हैं जब वे या तो संकट में फंस चुके होते हैं या संकट में डूब चुके होते हैं। यदि व्यक्ति समय समय पर अपने ग्रहों के बारे में जानकारी लेता रहे तो किसी हद तक वह अपना काफी ज़्यादा नुक्सान बचा सकता है। व्यक्ति अज्ञानता वश, अहंकार वश या ज़िद में आ कर ज्योतिष जैसे ज्ञान का सही समय पर सहारा नहीं

लेता है अन्यथा राहु जैसे ग्रह को अपने लिए सकारात्मक ग्रह बना कर भरपूर धन लाभ लिया जा सकता है। व्यक्ति को सिर्फ यह करना होता है की शुद्ध चन्दन का टुकड़ा जो चांदी में पेन्डेन्ट के रूप में बनवाया जाए और बुधवार के दिन सुबह शुभ मुहूर्त देख कर धागे में या चांदी की ज़ंजीर में या चेन में पहन लिया जाए। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि चन्दन का लॉकेट शुद्ध मलयगिरि की शुद्ध चन्दन की लकड़ी का बना होना चाहिए। चन्दन की लकड़ी पहनने से राहु की सांप वाली प्रवृत्ति खुश हो जाती है क्योंकि सांप को चन्दन की सुगंध अति प्रिय होती है। चन्दन का लॉकेट गले में धारण करने से जातक काल सर्प दोष से भी सुरक्षित हो जाता है। चन्दन का लॉकेट व्यक्ति की काल सर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा करता है। यदि कोई जातक बहुत अधिक परिश्रम करता है परन्तु फल की प्राप्ति न्यूनतम स्तर पर रहती है, भाग्य साथ नहीं देता है, धन

अनावश्यक रूप से समाप्त हो रहा होता है, जातक के सम्बन्ध घर में एवं बाहर दोनों जगह बिगड़ रहे होते हैं तब सम्भावना इस बात की अधिक हो जाती है कि व्यक्ति की कुंडली काल सर्प दोष से युक्त है और जातक काल सर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों से पीड़ित है। यदि जातक की कुंडली में राहु गलत भाव में स्थित हैं एवं राहु के नकारात्मक प्रभावों से जातक परेशान है तो उसे चन्दन का लॉकेट चांदी में बनवाकर अवश्य धारण करना चाहिए। चन्दन का लॉकेट जातक को कुछ ही दिनों में सकारात्मक परिणाम देने लगता है। चन्दन का लॉकेट पहनने से पहले निम्न लिखित निर्देशों का पालन करना चाहिए -:



  • लॉकेट में प्रयोग किया गया चन्दन किसी विश्वसनीय स्थान से खरीदा जाए और शुद्धता की पूरी जांच कर ली जाए अन्यथा लॉकेट पहन ने मात्र से जातक को कोई लाभ नहीं होने वाला है।
  • जातक चन्दन के लॉकेट को बुधवार की सुबह शुभ मुहूर्त दिखवा कर स्नान आदि से निवृत हो कर शिव का ध्यान करते हुए धारण करे और मन में यह विश्वास रखे कि राहु का नकारात्मक प्रभाव एवं काल सर्प दोष का दुष्प्रभाव उसके जीवन से जाता रहेगा।
  • चन्दन का लॉकेट एक बार पहन ने के बाद उतारना नहीं चाहिए।
  • जिस जातक को राहु की वजह से या काल सर्प दोष की वजह से कष्ट हैं उसे महादेव की आराधना एवं महामृत्युंजय का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है।

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